भगवान शिव के ऐसे ही गुणों के पुराण प्रसंगों से जुड़े अनेक पौराणिक और धार्मिक स्थल हैं। इनमें से ही एक है - शिव खोड़ी की गुफा। यह जम्मू कश्मीर के रनसू क्षेत्र में स्थित है। धार्मिक आस्था है कि इस गुफा में रखी भगवान शिव की पिण्डियों के दर्शन से हर कामना पूरी हो जाती है।
माना जाता है कि यह गुफा स्वयं भगवान शंकर ने बनाई है। पुराण कथा यह है कि भस्मासुर ने तप कर शंकर को प्रसन्न किया। तब भस्मासुर ने शिव से यह वर पाया कि वह जिसके सिर पर हाथ रखे वह भस्म हो जाए। वर मिलते ही भस्मासुर, भगवान शंकर पर ही हाथ रखने के लिए आगे बढ़ा। इस पर भगवान शंकर और भस्मासुर में युद्ध हुआ। इसी कारण इस क्षेत्र का नाम रणसु या रनसु हुआ। भस्मासुर ने हार नहीं मानी। तब भगवान शंकर वहां से निकलकर ऊंची पहाड़ी पहुंचे और एक गुफा बनाकर उसमें छुपे। यही शिव खोड़ी की गुफा के नाम से प्रसिद्ध है।
माना जाता है कि भगवान शंकर को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने बहुत ही सुंदर स्त्री का रुप लेकर भस्मासुर को मोहित किया। सुंदरी रुप विष्णु के साथ नृत्य के दौरान भस्मासुर शिव का वर भूल गया और अपने ही सिर पर हाथ रख कर भस्म हो गया।
शिव खोड़ी की गुफा में शिव के साथ पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी की पिण्डियों के दर्शन होते हैं। यह स्वयंभू मानी जाती है। इनके साथ यहां सात ऋषियों, पाण्डवों और राम-सीता की भी पिण्डियां है। पिण्डियों पर गुफा में से जल की बूंदे गिरने से प्राकृतिक अभिषेक होता है। शिव द्वारा बनाई गई यह गुफा बहुत गहरी है, जिसका कोई अंतिम सिरा दिखाई नहीं देता। एक स्थान पर यह दो भागों में बंट जाती है, माना जाता है कि इनमें से एक रास्ता अमरनाथ गुफा में निकलता है।
शिव खोड़ी गुफा पहुंच मार्ग जम्मू और कटरा से है। इन स्थानों से रनसू क्रमश: १४० और ८० किमी दूर है। रनसू से शिवखोड़ी गुफा जाने के लिए लगभग ३-४ किमी की चढ़ाई है। जो सीधे गुफा के पास ही समाप्त होती है।
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